मन्दिर बने सामाजिक चेतना के केंद्र: अरविन्द भाई ओझा

मन्दिर बने सामाजिक चेतना के केंद्र: अरविन्द भाई ओझा

दीपक कुमार त्यागी

मोदीनगर। वृद्धाश्रम मोदीनगर में चल रही हनुमत कथा विराम के समय आज हमुमन जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कथा व्यास अरविन्द भाई ओझा ने कहा हमारे मन्दिर केवल पूजा करने का स्थान नही, बल्कि समाज की जाग्रति के केन्द्र बनने चाहिए। समाज से आवाह्न करते हुए उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रम की सहायता के लिए अधिक से अधिक लोगों को आगे आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम गृह्रस्थ लोगो की जिम्मेदारी है की गुरु और पुरोहित के जीवन यापन की व्यवस्था करे जिससे वो अपने शास्त्र व् राष्ट्र को बचाने के लिए युवाओं को संस्कारित कर सके। हनुमानजी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए महाराज जी ने कहा कि हनुमान जी की पारखी दृष्टि है वे राक्षसों की नगरी लंका में भी सज्जन लोगों की खोज करते है और वे विभीषण को खोज लेते है। हनुमानजी ने विभीषण को राम तक पहुंचने का मंत्र देते हुए कहा कि जो समस्त संसार में परमात्मा का दर्शन करते हुए समस्त पशु पक्षी जीव जंतु पेड़ पौधे सब की सेवा करता है भगवान ऐसे सेवक पर प्रेम और कृपा की वर्षा करते हैं।

उन्होंने कहा कि हनुमान चालीसा ऐसा ग्रन्थ है जिसमें हमे भक्ति, भक्त, भगवंत और गुरु मिलते हैं जो हमें भगवान तक पहुचने का मन्त्र व पथ बताता है। गुरु की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जो हमें भगवान से परमात्मा से वेदों और सनातन परम्परा से जोड़े वही गुरु होता है, जो इनसे तोडकर अपने से जोड़ने की कहे वो गुरु नही हो सकता। उन्होंने कहा कि जीवन सरिता सुख और दुःख दो किनारों के बीच बहते हुए आगे बढती है। जैसे नदी के दो किनारे एक साथ नही आ सकते उसी प्रकार जीवन में सुख दुख एक साथ नही आते।

कथा व्यास अरविन्द भाई ओझा ने कहा कि हनुमान जी ने भगवन के काम के लिए अपने नाम को मिटा दिया लंका में हनुमान जी का नाम कोई नहीं जानता केवल राम दूत के नाम से ही सब जानते है अर्थात जो परमात्मा के लिए अपने नाम रूप यश को त्याग देता है उसका गुणगान परमात्मा स्वयं अपने मुख से करते हैं। कथा विराम पर स्वामी कल्याणदेव वृद्धाश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष बसंत शर्मा ने सभी का धन्यवाद व्यक्त किया। आज कथा में यजमान
संदीप गुप्ता-ममता गुप्ता, सुमित भारद्वाज- वर्षा भारद्वाज रहे। अन्य मुख्य लोगों में बसन्त शर्मा, अनिल कुमार शर्मा, प्रमोद शर्मा, जयप्रकाश बंसल, जितेंद्र अग्रवाल व अवधेश गुप्ता आदि रहे।

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