गाजियाबाद में सजी ग़ज़लों की महफिल

चरागे-उल्फ़त, कहीं जला दो, हमारा क्या है,
तुम्हारा दिल है, कहीं लगा लो, हमारा क्या है। – दीक्षित दनकौरी

गाजियाबाद। साहित्यिक संस्था काव्यलोक द्वारा गाजियाबाद में एक ग़ज़ल गोष्ठी आयोजित की गई जिसमें प्रख्यात शायर दीक्षित दनकौरी द्वारा संपादित ग़ज़ल संकलन ‘हमारा क्या है’ के दोनों संकलनों में शामिल, गाजियाबाद और दिल्ली NCR के करीब 40 रचनाकारों ने अपनी-अपनी प्रकाशित ग़ज़ल का पाठ किया। गोष्ठी की अध्यक्षता बुलंदशहर के वरिष्ठ शायर डा. इरशाद अहमद ‘शरर’ ने की। सैयद अली अब्बास नौगांवी ने गोष्ठी का शानदार संचालन किया। गोष्ठी के पश्चात वरिष्ठ शायर ऐन मीम कौसर ने सभी शायरों की ग़ज़लों और प्रस्तुति का विश्लेषण किया, उन ग़ज़लों की समीक्षा की एवं ग़ज़लों की खूबियां/ कमियां बताई।
सभी प्रतिभागी बहुत ही उल्लसित और खुश थे कि उनकी ग़ज़ल इतने व्यापक स्तर पर चर्चित हो रही है। काव्यलोक के अध्यक्ष दीक्षित दनकौरी ने गोष्ठी में उपस्थित सभी शायरों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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