रायपुर साहित्य उत्सव में टमूर्धन्य साहित्यकारों द्वारा “चौथा आयाम” हिंदी कविता संकलन का विमोचन किया गया…

रायपुर: जैसे अशोक की लाट में तीन शेर दिखाई देते हैं चौथा होता तो है पर दिखता नहीं… ऐसे ही जीवन की लाट में कुछ पहलू होते है.. जो चौथे शेर की तरह होते है… जब सब कुछ पाने के बाद भी कुछ पाना शेष रहता है, सब कुछ करने के बाद कुछ करना बाकी रहता है , बहुत कुछ समझने के बाद भी बहुत कुछ समझना बचा  रहता है.. यही बाकी , बचा और शेष ही वो चौथा आयाम है,,.. जो जीवन का मेरुदंड बनता है…जीवन को साधे रहता है, एक साध चलती रहती है और चलाती रहती है।
मन, बुद्धि, शरीर के आयामों से होती हुई जीवन यात्रा जब आत्मा को बूझने का प्रयास करती है तो चौथा आयाम हिंदी कविता संकलन का सृजन होता है।

रायपुर में चल रहे साहित्य उत्सव में मूर्धन्य साहित्यकारों द्वारा “चौथा आयाम” हिंदी कविता संकलन का विमोचन किया गया। जिसकी लेखिका डॉ सुप्ती खरे हैं। वो पेशे से एक जनरल सर्जन हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश से अपनी MBBS एवं MS की डिग्री प्राप्त की है और वर्तमान समय में वो राजस्थान में सेवारत हैं। डॉ सुप्ती खरे अपने पेशे के साथ-साथ लेखन और विभिन्न प्रकार के सामाजिक कार्यों से जुड़कर समाज में योगदान भी देती रहती हैं। इस पुस्तक को प्राप्त करने के लिए Amazon पर आर्डर कर सकते हैं, जिसके लिए निचे पुस्तक के चित्र पर क्लिक कर सकते है।

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