लम्पी स्किन डिजीज से बचाव हेतु पशुपालकों से अपील

विज्ञप्ति-5


गाजीपुर 22 अगस्त 2025 (सू0वि)-

मुख्य पुश चिकित्साधिकारी गाजीपुर ने द्वारा पशुपालकों से अपील किया है कि लम्पी स्किन डिजीज रोग के लक्षण, लम्पी स्किन डिजीज एक विषाणुजनित रोग है। रोग में पशु को तेज बुखार, आंख व नाक से पानी गिरना, पैरों में सूजन, पूरे शरीर में कठोर एवं चपटी गांठ आदि प्रकार के लक्षण पाये जाते हैं।

कभी-कभी सम्पूर्ण शरीर की चमढ़ी विशेष रूप से सिर, गर्दन, धूधन, थनों, गुदा व अंडकोष या योनिमुख के बीच के भाग पर गांठों के उभार बन जाते है। कभी-कभी पूरा शरीर गांठो से ढक जाता है। गांठे (नोडयूल) नेकोटिक और अल्सरेटिव भी हो सकते है, जिससे मक्खियों द्वारा अन्य स्वस्थ पशुओं में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। गम्भीर रूप से प्रभावित जानवरों में नैकोटिय घाय, श्वसन और जठरांत्र में भी विकसित हो जाते है। श्वसन पथ में घाव होने से सांस लेने में कठिनाई होती है, पशुओं का वजन घट जाता है. शरीर कमजोर हो जाता है एवं अत्याधिक कमजोरी से पशु की मृत्यु भी हो सकती है। गाभिन पशुओं में गर्भपात हो सकता है. दुधारू गायों में दुग्ध उत्पादन काफी कम हो जाता है।


रोग प्रकोप के समय क्या करें के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सर्वप्रथम निकटतम पशु चिकित्सालय / पशु सेवा केन्द्र को सूचित करें। प्रभावित पशु को स्वस्थ पशु से अलग करें। प्रभावित पशुओं का आवागमन प्रतिबन्धित करें। पशुओं को सदैव साफ पानी पिलायें। पशु के दूध को उबाल कर पियें। पशुओं को मच्छरों, मक्खियों, किलनी आदि से बचाने हेतु पशुओं के शरीर पर कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करें।

पशुबाड़े और पशु खलिहान की फिनायल / सोडियम हाइपोक्लोराइट इत्यादि का छिड़काव कर उचित कीटाणु शोधन करें। बीमारी पशुओं की देखभाल करने वाले व्यक्ति को भी स्वस्थ पशुओं के बाड़े से दूर रहना चाहिए। पहले स्वस्थ पशुओं को चारा व पानी दें, फिर बीमार पशुओं को दें। बीमार पशुओं का प्रबन्धन करने के पश्चात् हाथ साबुन से धोयें। रोग प्रकोप के समय क्या ना करें, क्या ना करें  के बारे में बताया कि  सामूहिक चराई के लिए अपने पशुओं को ना भेजे। पशु मेला एवं प्रदर्शनी में अपने पशुओं का ना भेजे।

बीमार एवं स्वस्थ पशुओं को एकसाथ चारा-पानी न करायें। प्रभावित क्षेत्रों से पशु खरीद कर न लायें। यदि किसी पशु की मृत्यु होती है. तो शव को खुले में न फेकें एवं वैज्ञानिक विधि से दफनायें। रोगी पशु के दूध को बछड़े को न पिलायें। पशुपालक के द्वार पर पशु चिकित्सा सुविधा के लिए टोल फ्री नं०- 1962 पर सम्पर्क किया जा सकता है।
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जिला सूचना कार्यालय द्वारा प्रचारित।

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