भाजपा की बंगाल विजय, भीषण युद्ध जैसे माहौल में कारगर हुई सुनील बंसल की रचना : संजय तिवारी

बंगाल का चुनाव कोई सामान्य चुनाव नहीं था। यह एक भीषण  युद्ध लड़ने जैसा ही था। बांग्लादेशी घुसपैठ और शहरों से लेकर गांव गांव में स्थापित गुंडों और अपराधियों के माध्यम से बनाए गए एक डर और आतंक से भयभीत मतदाताओं को वोट के लिए राजी करना, उन्हें बूथ तक ले कर आना और उन्हें सुरक्षित होने का आभास करना बहुत कठिन कार्य था। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का भरपूर संरक्षण और उनके अभिभावकत्व के बीच यह कार्य करें कैसे ? यह सवाल था जिसके जवाब के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल को चुना गया। सुनील बंसल की टीम ने अब से लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व ही बंगाल में डेरा डाला था। आज बंसल और उनकी चुनावी रचना के परिणाम को दुनिया देख रही है।
जिस बंगाल के बारे में कहा जा रहा था कि वहां ममता बनर्जी को हिलाना बहुत कठिन है उसी बंगाल में सुनील बंसल की रचना और चुनावी व्यूह ने ममता बनर्जी और उनकी पूरी शक्ति को ऐसा पानी पिलाया है जिसकी कल्पना तक उन्होंने नहीं की थी। वैसे भी बंसल जी की यही विशेषता उन्हें भाजपा के नए संकट मोचक के रूप में अब स्थापित कर रही है। बंसल जी और उनकी टीम का हौसला निश्चित रूप से बहुत ऊंचा होगा लेकिन उससे भी ज्यादा विश्वास जगा होगा गृहमंत्री अमित शाह के भीतर जिन्होंने खुद भी 16 दिन का प्रवास किया और नियंत्रण कक्ष में टीम का हौसला भी बढ़ाया। विजय के लिए चुनावी रचनाकार के रूप में सुनील बंसल का यह उभार भाजपा के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है।
यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इतने हिंसक और भय युक्त परिवेश में बंसल ने ऐसी रचना रची कि प्रचार से लेकर आज परिणाम आने तक पश्चिम बंगाल का यह पहला चुनाव है जिसमें खून के धब्बे नहीं हैं। किसी कार्यकर्ता की जान नहीं गई है। यह तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब बंगाल को वामपंथ और उसके साए के रूप में जन्मी तृणमूल की हिंसक राजनीति से भी आज मुक्ति मिल रही है। इसके लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह जैसे अभिभावकों के संकल्प को क्रियान्वित कर बंगाल में कमल खिलाने वाले सुनील बंसल और उनकी पूरी टीम निश्चित रूप से बधाई की पात्र है।

Add a Comment

Your email address will not be published.

Recent Posts