स्वामी सहजानंद सरस्वती जी की 137वीं जयंती बी एस डी पब्लिक स्कूल रेवतीपुर के सभागार में आयोजित हुआ।

स्वामी सहजानंद सरस्वती स्मृति न्यास, गाजीपुर के तत् वावधान में स्वामी सहजानंद सरस्वती जी की 137वीं जयंती बी एस डी पब्लिक स्कूल रेवतीपुर के सभागार में उल्लास एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री मंत्र के सामूहिक वाचन से हुआ। तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों द्वारा स्वामी जी, मां सरस्वती एवं बाबा श्यामदास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन किया गया तथा उपस्थित जनसमूह द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
न्यास का परिचय संस्थापक सदस्य श्री मारुति कुमार राय, एडवोकेट ने प्रस्तुत किया। प्रथम वक्ता के रूप में श्री अरुण कुमार राय ने स्वामी सहजानंद सरस्वती के जीवनवृत्त एवं उनके ऐतिहासिक योगदानों पर विस्तृत प्रकाश डाला। श्री राजेश राय ‘बागी’ ने गाजीपुर जनपद में सार्वजनिक स्थलों पर स्वामी जी के नाम से पार्क या स्मारक न होने को खेदजनक बताया।


श्री राजेश राय ‘पिंटू’ ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती सामाजिक न्याय के वास्तविक अग्रदूत थे। वे जमींदार परिवार में जन्म लेने के बावजूद जमींदारी प्रथा के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका और मजदूर-किसानों में भगवान का दर्शन किया।
श्री व्यासमुनि राय ने कहा कि किसी व्यक्ति की नहीं, अपितु उसके व्यक्तित्व की पूजा होनी चाहिए। सच्चा संत वही है जो समाज के अवगुणों को भी स्वीकार कर उन्हें सुधारने का प्रयास करे। बबूरंग जी ने काव्यात्मक शैली में स्वामी जी के जीवन पर प्रकाश डाला। बाबूलाल यादव ‘मानव’ जी ने किसानों की वर्तमान दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए अपने कार्यक्रम की जानकारी दी।


श्री माधव कृष्ण राय ने कहा कि संसार में उपलब्ध प्रत्येक साधन मात्र एक टूल है; आलोचना का भी एक विवेक होता है। हमें प्रदूषण को सहना नहीं, उसका विवेकपूर्ण विरोध करना है, उसका प्रसार नहीं करना है। उन्होंने देश को आगे बढ़ाने वाली विचारधारा की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य वक्ता डॉ. हरिकेश सिंह ने कहा कि “सांस लेना भी धर्म है; धर्म अत्यंत व्यापक और उदार अवधारणा है।” उन्होंने कहा कि आध्यात्म वही है जो सजीव और निर्जीव में भी ममता और एकत्व का अनुभव करे। जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। न्यास का अर्थ जीवन को बेहतर बनाने की साधना है। प्रतिभा जाति से ऊपर होती है और वैचारिकी मानव जाति की उत्कृष्ट उपलब्धि है। स्वामी सहजानंद सरस्वती क्रांतियोगी, कर्मयोगी और चेतनायोगी थे। वे स्वामी विवेकानंद, सुभाषचंद्र बोस और स्वामी अरविंद की परंपरा के प्रेरक व्यक्तित्व थे। उन्होंने कहा कि स्वामी जी जमींदार नहीं, बल्कि “जमीरदार” थे।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख श्री मुकेश राय ने कहा कि उस कालखंड और वर्तमान कालखंड में परिस्थितियों का मूल स्वरूप बहुत भिन्न नहीं है। अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री ओम नारायण प्रधान ने स्पष्ट किया कि ‘गीताहृदय’ गीता की मार्क्सवादी व्याख्या नहीं है, बल्कि गीता और मार्क्सवाद के बीच सेतु का कार्य करती है। उन्होंने कृषि को उद्योग का दर्जा देने की मांग भी रखी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री ओम नारायण प्रधान ने की तथा संचालन श्री विपिन बिहारी राय ने किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रबुद्ध जन, सामाजिक कार्यकर्ता एवं किसान बंधु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले ज्ञानेंद्र राय छोटू पर्यावरण के क्षेत्र में वृक्ष पुरुष रणधीर यादव, साहित्य के क्षेत्र में विनय राय बबूरंग जी को तथा सेवा निवृत कैप्टन बब्बन राम जी को अपने वर्ग में खेल के क्षेत्र में कई पदक जीतने के लिए सम्मानित किया गया
कार्यक्रम का प्रारंभ बी एस डी पब्लिक स्कूल रेवतीपुर की छात्राओं के द्वारा सरस्वती बंदना तथा स्वागत गीत से हुआ बच्चियों ने अपने मधुर स्वर में कई होली गीत प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया
कार्यक्रम में सर्व श्री सच्चिदानंद राय चाचा सच्चिदानंद राय नेता जी, ओमप्रकाश राय जिलाध्यक्ष भाजपा,श्री शशिधर राय जी श्री विनोद राय जी कृष्णा नंद राय जी, दिनेश चंद्र राय जी,शिवशंकर राय जी, श्री रामनाथ ठाकुर, शी दिनेशचंद्र शर्मा विनोद खरवार जी,मुक्ति नारायण राय जी, राजेंद्र राय, रासबिहारी राय जी, बिपुल राय जी,कृपा शंकर राय जी अरुण राय आजाद।

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